ENGLISH
Advance Search
वार्षिक प्रतिवेदन | निवेशक शिक्षण | राजभाषा नीति | प्रोत्साहण योजणाएँ | उपयोगी संपर्क
  मूल पृष्ठ         विभाग         सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५         शब्दकोश         संपर्क करें  
  मूल पृष्ठ » राजभाषा नीति
 
राजभाषा नीति
 
सांविधानिक प्रावधान
भारत के सांविधान में राजभाषा से संबंधित भाग –१७
अध्याय १ – संघ की भाषा
अनुच्छेद ३४३. संघ की राजभाषा
(१) संघ की राजभाषा हिंदी और लिपी देवनागरी होगी, संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
(२) खंड (१) में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था: परन्तु राष्ट्रपति उक्त अवधि  के दौरान, आदेश  द्वारा, संघ के शासकीय प्रयोजनों में से किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिंदी भाषा का और भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप के अतिरिक्त देवनागरी रूप का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा।
(३) इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, संसद्‌ उक्त पन्द्रह वर्ष की अवधि के पश्चात विधि द्वारा  
     (क) अंग्रेजी भाषा का, या
     (ख) अंकों के देवनागरी रूप का,     ऐसे प्रयोजनों के लिए प्रयोग उपबंधित कर सकेगी जो ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट किए जाएं।
 
अनुच्छेद ३४४ राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति
(१) राष्ट्रपति, इस संविधान के प्रारंभ से पांच वर्ष की समाप्ति पर और तत्पश्चात ऐसे प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति  पर, आदेश द्वारा, एक आयोग गठित करेगा जो एक अध्यक्ष और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ठ विभिन्न भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जिनको राष्ट्रपति नियुक्त करे और आदेश में आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चित की जाएगी।   
(२) आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह राष्ट्रपति को--
     (क) संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग,
     (ख) संघ के सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर निर्बंधनों,
     (ग) अनुच्छेद ३४८ में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा,
     (घ) संघ के किसी एक या अधिक विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों के रूप,    
     (ड) संघ की राजभाषा तथा संघ और किसी राज्य के बीच या एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच पत्रादि की भाषा और उनके प्रयोग के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को निर्देशित किए गए किसी अन्य विषय,
के बारे में सिफारिश करे।
(३)  खंड (२) के अधीन अपनी सिफारिश करने में, आयोग भारत की औद्योगिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक उन्नति का और लोक सेवाओं के संबध में अहिंदी भाषी क्षेत्रों के व्यक्तियों के न्यायसंगत दावों और हितों का सम्यक ध्यान रखेगो।
(४)  एक समिति गठित की जाएगी जो तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी जिनमें से बीस लोक सभा के सदस्य होंगे और दस राज्य सभा के सदस्य होंगे जो क्रमश: लोक सभा के सदस्यों और राज्य सभा के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित होंगे।
(५) समिति का यह कर्तव्य होगा कि वह खंड (१) के अधीन गठित आयोग की सिफारिशों की परीक्षा करे और राष्ट्रपति को उन पर अपनी राय के बारे में प्रतिवेदन दे। (६) अनुच्छेद ३४३ में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति खंड (५) में निर्दिष्ट प्रतिवेदन पर विचार करने के पश्चात उस संपूर्ण प्रतिवेदन के या उसके किसी भाग के अनुसार निदेश दे सकेगा।
 
अध्याय २ – प्रादेशिक भाषा‍एं
अनुच्छेद ३४५ राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं --
अनुच्छेद ३४६ और अनुच्छेद ३४७ के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, उस राज्य में प्रयोग होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य के सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा या भाषाओं के रूप में अंगीकार कर सकेगा: परंतु जब तक राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, अन्यथा उपबंध न करे तब तक राज्य के भीतर उन शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था।
 
अनुच्छेद ३४६. एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा --
संघ में शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने के लिए तत्समय प्राधिकृत भाषा,  एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच तथा किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा होगी: परंतु यदि दो या अधिक राज्य यह करार करते हैं कि उन राज्यों के बीच पत्रादि की राजभाषा हिंदी भाषा होगी तो ऐसे पत्रादि के लिए उस भाषा का प्रयोग किया जा सकेगा।
 
अनुच्छेद ३४७. किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध --
यदि इस निमित्त मांग किए जाने पर राष्ट्रपति  का यह समाधान हो जाता है कि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त भाग यह चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राज्य द्वारा मान्यता दी जाए तो वह निदेश दे सकेगा कि ऐसी भाषा को भी उस राज्य में सर्वत्र या उसके किसी भाग में ऐसे प्रयोजन के लिए, जो वह  विनिर्दिष्ट करे, शासकीय मान्यता दी जाए।
 
अध्याय ३ -  उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों आदि कीभाषा
अनुच्छेद ३४८. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा --
  1. इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जब तक संसद्‌ विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक -- 
  2. उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी भाषा में होंगी,
  3. (i) संसद्‌ के प्रत्येक सदन या किसी राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन में पुर:स्थापित किए जाने वाले सभी विधेयकों या   प्रस्तावित किए जाने वाले उनके संशोधनों के,
(ii) संसद या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित सभी अधिनियमों के और राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित सभी अध्यादेशों के, और
(iii) इस संविधान के अधीन अथवा संसद या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन निकाले गए या बनाए गए सभी आदेशों, नियमों, विनिमयों और उपविधियों के , प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे ।
  1. खंड  (१) के उपखंड  (क) में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में, जिसका मुख्य स्थान उस राज्य में है, हिन्दी भाषा का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा:
परंतु इस खंड की कोई बात ऐसे उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश को लागू नहीं होगी।
  1. खंड (१) के उपखंड  (ख) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी राज्य के विधान-मंडल ने, उस विधान-मंडल में पुर: स्थापित विधेयकों या उसके द्वारा पारित आधिनियमों में अथवा उस राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों में अथवा उस उपखंड के पैरा में निर्दिष्ट किसी आदेश, नियम, विनियम या उपविधि में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भाषा से भिन्न कोई भाषा विहित की है वहां उस राज्य के राजपत्र में उस राज्य के राज्यपाल के प्राधिकार से प्रकाशित अंग्रेजी भाषा में उसका अनुवाद इस अनुच्छेद के अधीन उसकी अंग्रेजी भाषामें प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा।
 
अनुच्छेद ३४९.  भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया—
इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि के दौरान, अनुच्छेद ३४८ के खंड (१) में उल्लिखित किसी प्रयोजन के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के लिए उपबंध करने वाला कोई विधेयक या संशोधन संसद के किसी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी के बिना पुर: स्थापित या प्रस्तावित नहीं किया जाएगा और राष्ट्रपति किसी ऐसे विधेयक को पुर: स्थापित या किसी ऐसे संशोधन को प्रस्तावित किए जाने की मंजूरी अनुच्छेद ३४४ के खंड  (१) के अधीन गठित आयोग की सिफारिशों पर और उस अनुच्छेद के खंड (४) के अधीन गठित समिति के प्रतिवेदन पर विचार कराने के पश्चात ही देगा, अन्यथा नहीं।
 
अध्याय ४  - विशेष निदेश
अनुच्छेद ३५०. व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा -
प्रत्येक व्यक्ति किसी व्यथा के निवारण के लिए संघ या राज्य के किसी अधिकारी या प्राधिकारी को, यथास्थिति, संघ में या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भाषा में अभ्यावेदन देने का हकदार होगा।
 
अनुच्छेद ३५०. क. प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं -
प्रत्येक राज्य और राज्य के भीतर प्रत्येक स्थानिय प्राधिकारी भाषाई अल्पसंख्यक-वर्गों के बालकों को शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था करने का प्रयास  करेगा और राष्ट्रपति किसी राज्य को ऐसे निदेश दे सकेगा जो वह ऐसी सुविधाओं का उपबंध सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक या उचित समझता है।
 
अनुच्छेद ३५०. ख. भाषाई अल्पसंख्यक – वर्गों के लिए विशेष अधिकारी
  1. भाषाई अल्पसंख्यक - वर्गों के लिए एक विशषे अधिकारी होगा जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करेगा।
विशेष अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह इस संविधान के अधीन भाषाई अल्पसंख्याक-वर्गों के लिए उपबंधित रक्षोपयों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे और उन विषयों के संबंध में एसे अंतरालों पर जो राष्ट्रपति निर्दिष्ट करें, राष्ट्रपति को प्रतिवेदन दे और राष्ट्रपति ऐसे सभी प्रतिवेदनों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा और संबंधित राज्यों की सरकारों को भिजवाएगा।
 
अनुच्छेद ३५१. हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेश
संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामाजिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिंदुस्थानी आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द-भंडार के लिए मुख्यत: संस्कृत से और गौणत: अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।
 
राजभाषा अधिनियम, १९६३
(यथा संशोधित, १९६७)
(१९६३ का अधिनियम संख्यांक १९)
उन भाषाओं का, जो संघ के राजकीय प्रयोजनों, संसद में कार्य के संव्यवहार, केन्द्रीय और राज्य अधिनियमों और उच्च न्यायालयों में कतिपय प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाई जा सकेंगी, उपबन्ध करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो:
 
१. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ -
  1. (१) यह अधिनियम राजभाषा अधिनियम, १९६३ कहा जा सकेगा।
(२) धारा ३, जनवरी, १९६५ के २६ वें दिन को प्रवृत्त होगी और इस अधिनियम के शेष उपबन्ध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी।
 
२. परिभाषा‍एं – इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
(क) ‘नियत दिन’ से, धारा ३ के सम्बन्ध में, जनवरी, १९६५ का २६ वां दिन अभिप्रेत है और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के सम्बन्ध मेय वह दिन अभिप्रेत है जिस दिन को वह उपबन्ध पअवृत्त होता है;
(ख)  हिन्दी से वह हिन्दी अभिप्रेत है जिसकी लिपी देवनागरी है।
३. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए और संसद में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भाषा का रहना –
(१)  संविधान के प्रारम्भ से पन्द्रह वर्ष की कालावधी की समाप्ति हो जाने पर भी, हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा, नियत दिन से ही,
(क) संघ के उन सब राजकीय प्रयोजनों के लिए जिनके लिए वह उस दिन से ठीक पहले प्रयोग में लाई जाती थी; तथा
(ख)  संसद में कार्य के संव्यवहार के लिए प्रयोग में लाई जाती रह सकेगी:
परंतु संघ और किसी ऐसे राज्य के बीच, जिसने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया है, पत्रादि के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा प्रयोग में लाई जाएगी:
परन्तु यह और कि जहां किसी ऐसे राज्य के, जिसने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में अपनाया है और किसी अन्य राज्य के, जिसने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया है, बीच पत्रादि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी को प्रयोग में लाया जाता है, वहां हिन्दी में ऐसे पत्रादि के साथ-साथ उसका अनुवाद अंग्रेजी भाषा में भेजा जाएगा:
परन्तु यह और भी कि इस उपधारा की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी ऐसे राज्य को, जिसने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया है, संघ के साथ या किसी ऐसे राज्य के साथ, जिसने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में अपनाया है, या किसी अन्य राज्य के साथ, उसकी सहमति से, पत्रादि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी को प्रयोग में लाने से निवारित करती है, और ऐसे किसी मामले में उस राज्य के साथ पत्रादि के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग बाध्यकर न होगा।
(२) उपधारा (१) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां पत्रादि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी या अंग्रेजी भाषा -  
(क)  केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के और दूसरे मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के बीच:
(ख)  केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी या उसके किसी कार्यालय के बीच :
(ग)  केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी या उसके किसी कार्यालय के और किसी अन्य ऐसे निगम या कम्पनी या कार्यालय के बीच ; प्रयोग में लाई जाती है वहां उस तारीख तक, जब तक पूर्वोक्त संबंधित मंत्रालय, विभाग, कार्यालय या विभाग या कम्पनी का कर्मचारीवृद हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं कर लेता, ऐसे पत्रादि का अनुवाद, यथास्थिति, अंग्रेजी भाषा या हिन्दी में भी दिया जाएगा।
 
३.  उपधारा  (१) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी हिन्दी और अंग्रेजी भाषा दोनों ही-
(क)  संकल्पों, साधारण आदशों, नियमों, अधिसूचनाओं, प्रशासनिक या अन्य प्रतिवेदनों या प्रेस विज्ञप्तियों के लिए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके किसी मंत्रालय, विभाग या कार्यालय द्वारा या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी द्वारा या ऐसे निगलम या कम्पनी के किसी कार्यालय द्वारा निकाले जाते हैं या किए जाते हैं;
(ख)  संसद के किसी सदन या सदनों के समक्ष रखे गए प्रशासनिक तथा अन्य प्रतिवेदनों और राजकीय कागज पत्रों के लिए;
(ग)  केन्द्रीय सरकार या उसके किसी मंत्रालय, विभाग या कार्यालय द्वारा या उसकी ओर से या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी द्वारा या ऐसे निगम या कम्पनी के किसी कार्यालय द्वारा निष्पादित संविदाओं और करारों के लिए तथा निकाली गई अनुज्ञप्तियों, अनुज्ञापत्रों, सूचनाओं और निविदा-प्ररूपों के लिए, प्रयोग में लाई जाएगी।
(४)  उपधारा (१) या उपधारा (२) या उपधारा (३) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि केन्द्रीय सरकार धारा ८ के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उस  भाषा या उन भाषाओं का उपबन्ध कर सकेगी जिसे या जिन्हें संघ के राजकीय प्रयोजन के लिए , जिसके अन्तर्गत किसी मंत्रालय, विभाग, अनुभाग या कार्यालय का कार्यकरण है, प्रयोग मे लाया जाना है और ऐसे नियम बनाने में राजकीय कार्य के शीघ्रता और दक्षता के साथ निपटारे का तथा जन साधारण के हितों का सम्यक ध्यान रखा जाएगा और इस प्रकार बनाए गए नियम विशिष्टतया यह सुनिश्चित करेंगे कि जो व्यक्ति  संघ के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा कर रहे हैं और जो या तो हिन्दी में या अंग्रेजी भाषा में प्रवीण हैं वे प्रभावी रूप से अपना काम कर सकें और यह भी कि केवल इस आधार पर कि वे दोनों ही भाषाओं में प्रवीण नहीं है उनका कोई अहित नहीं होता है। (५) उपधारा (१) के खंड (क) के उपबन्ध और उपधारा (२), उपधारा (३) और उपधारा (४), के उपबन्ध तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक उनमें वर्णित प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग समाप्त कर देने के लिए ऐसे सभी राज्यों के विधान मण्डलों द्वारा, जिन्होंने हिन्दी को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया है, संकल्प पारित नहीं कर दिए जाते और जब तक पूर्वोक्त  संकल्पों  पर विचार कर लेने पश्चात ऐसी समाप्ति के लिए संसद के हर एक सदन द्वारा संकल्प पारित नहीं कर दिया जाता ।
 
४. राजभाषा के सम्बन्ध में समिति -
(१) जिस तारीख को धारा ३ प्रवृत्त होती है उससे दस वर्ष की समाप्ति के पश्चात, राजभाषा के सम्बन्ध में एक समिति, इस विषय का संकल्प संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से प्रस्तावित और दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाने पर, गठित की जाएगी।
(२) इस समिति में तीन सदस्य होंगे जिनमें से बीस लोक सभा के सदस्य होंगे तथा दस राज्य सभा के सदस्य होंगे, जो क्रमश: लोक सभा के सदस्यों तथा राज्य सभा के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित होंगे ।
(३) इस समिति का कर्तव्य होगा कि वह संघ के राजकीय प्रयोजनों  के लिए हिन्दी के प्रयोग में की गई प्रगति का पुनर्विलोकन करें और उस पर सिफारिशें करते हुए राष्ट्रपति को प्रतिवेदन करें और राष्ट्रपति उस प्रतिवेदन को संसद के हर एक सदन के समक्ष रखवाएगा और सभी राज्य सरकारों का भिजवाएगा।
(४)  राष्ट्रपति उपधारा (३) में निर्दिष्ट प्रतिवेदन पर और उस पर राज्य सरकारों ने यदि कोई मत अभिव्यक्त किए हों तो उन पर विचार करने के पश्चात उस समस्त प्रतिवेदन के या उसके किसी भाग के अनुसार निदेश निकाल सकेगा: परन्तु इस प्रकार निकाले गए निदेश धारा ३ के उपबन्धों से असंगत नहीं होंगे।
 
५. केन्द्रीय अधिनियमों आदि का प्राधिकृत हिन्दी अनुवाद -
(१) नियत दिन को और उसके पश्चात शासकीय राजपत्र में राष्ट्रपति के प्राधिकार से प्रकाशित –
(क)  किसी केन्द्रीय अधिनियम का या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किसी अध्यादेश का अथवा
(ख)  संविधान के अधीन या किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन निकाले गए किसी आदेश, नियम, विनिमय या उपविधि का हिन्दी में अनुवाद उसका हिन्दी में प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा ।
(२)  नियत दिन से ही उन सब विधेयकों के, जो  संसद के किसी भी सदन में पुर:स्थापित किए जाने हों और उन सब संशोधनों के, जो उसनके सम्बन्ध में संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किए जाने हों, अंग्रेजी भाषा के प्राधिकृत पाठ के साथ-साथ उनका हिन्दी में अनुवाद भी होगा जो ऐसी रीति से प्राधिकृत किया जाएगा, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए।
 
६. कतिपय दशाओं में राज्य अधिनियमों का प्राधिकित हिन्दी अनुवाद -
जहां किसी राज्य के विधानमण्डल ने उस राज्य के विधानमण्डल द्वारा पारित अधिनियमों में अथवा उस राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों में प्रयोग के लिए हिन्दी से भिन्न कोई भाषा विहित की है  वहां, संविधान के अनुच्छेद ३४८ के खण्ड  (३) द्वारा अपेक्षित अंग्रेजी भाषा में उसके अनुवाद के अतिरिक्त, उसका हिन्दी में अनुवाद उस राज्य के शासकीय राजपत्र में, उस राज्य के राज्यपाल के प्राधिकार से, नियत दिन को या उसके पश्चात प्रकाशित किया जा सकेगा और ऐसी दशा में ऐसे किसी अधिनियम या अध्योदेश का हिन्दी में अनुवाद हिन्दी भाषा में उसका प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा।
 
७. उच्च न्यायलयों के निर्णयों आदि में हिन्दी या अन्य राजभाषा का वैकल्पिक प्रयोग -
नियत दिन से ही या तत्पश्चात किसी भी दिन से किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सम्माति से, अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिन्दी या उस राज्य की राजभाषा का प्रयोग, उस राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा पारित या दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के प्रयोजनों के लिए प्राधिकृत कर सकेगा और जहां कोई निर्णय, डिक्री या आदेश (अंग्रेजी भाषा से भिन्न) ऐसी किसी भाषा में पारित किया या दिया जाता है वहां उसके साथ-साथ उच्च न्यायालय के प्राधिकार से निकाला गया अंग्रेजी भाषा में उसका अनुवाद भी होगा।
 
८. नियम बनाने की शक्ति
(१) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी।
(२)  इस धारा के अधीन बनाया गया हर नियम, बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र, संसद के हर एक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के, लिए रखा जाएगा। वह अवधि एक सत्र में, अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए समहत हो जाएं तो तत्पश्चात वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा। यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात यह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव हो होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
 
९. कतिपय उपबन्धों का जम्मू – कश्मीर को लागू न होना
धारा ६ और धारा ७ के उपबन्ध जम्मू- कश्मीर राज्य को लागू न होंगे।
 
राजभाषा  (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग ) नियम , १९७६ (यथा संशोधित, १९८७)
सा. का. न. १०५२ – राजभाषा अधिनियम, १९६३ (१९६३ का १९) की धारा ३ की उपधारा (४) के साथ पठित धारा ८ द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात:-
 
१. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ -

(क)  इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा  (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, १९७६ है।
(ख)  इनका विस्तार, तमिलनाडु राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है।

(ग)  ये राजप में प्रकाश न की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
 
२. परिभाषाएं – इन नियमों में, जब  तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:-
(क) ‘अधिनियम’ से राजभाषा अधिनियम, १९६३ (१९६३ का १९) अभिप्रेत है;
(ख) ‘केन्द्रीय सरकार के कार्यालय के अन्तर्गत निम्नलिखित भी है, अर्थात;
(i) केन्द्रीय सरकार का कोई मंत्रालय, विभाग या कार्यालय
(ii) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किसी आयोग, समिति या अधिकरण का कोई कार्यालय; और 
(iii) केन्द्रीय करकार के स्वामित्व में या नियंत्रण के अधीन किसी निगम या कम्पनी का केई कार्यालय;
(ग) ‘कर्मचारी’ से केन्द्रीय सरकार के कार्यालय में नियोजित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(घ) ‘अधिसूचित कायार्लय से नियम १० के उप नियम (४) के अधीन अधिसूचित कार्यालय, अभिप्रेत है;
(ड) ‘हिन्दी में प्रवीणता’ से नियम ९ में प्रवीणता अभिप्रेत है;
(च) ‘क्षेत्र क’ से बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश  राज्य तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है;
(छ) ‘क्षेत्र ख’ से गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब राज्य और चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है;
(ज) ‘क्षेत्र ग ‘ से खंड (च) और  (छ) में निर्दिष्ट राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों से भिन्न राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है; (झ) हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान से नियम १० में वर्णित कार्यसाधक ज्ञान अभिप्रेत है।
 
३. राज्यों आदि और केन्द्रीय सरकार के कर्यालयों से भिन्न कर्यालयों के साथ पत्रादि -
(१) केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र ‘क’ में किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र को या ऐसे राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कर्यालय न हो) या व्यक्ति को पत्रादि असाधारण दशाओं को छोड़कर हिन्दी में होंगे और यदि उनमें से किसी को कोई पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा।
(२) केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से –
(क) क्षेत्र ‘ख’ किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) को पत्रादि सामान्यतया हिन्दी में होंगे और यदि इनमें से किसी को कोई पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा ; परन्तु यदि कोई ऐसा राज्य या संघ राज्य क्षेत्र यह चाहता है कि किसी विशिष्ट वर्ग या प्रवर्ग के पत्रादि या उसके किसी कर्यालय के लिए आशयित पत्रादि संबद्ध राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि तक अंग्रेजी या हिन्दी में भेजे जाएं और उसके साथ दूसरी भाषा में उसका अनुवाद  भी भेजा जाए तो ऐसे पत्रादि उसी रीति से भेजे जाएंगे;
(ख) क्षेत्र ‘ख’ के किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में भेजे जा सकते हैं।
(३) केन्द्रीय सरकार के कर्यालय से क्षेत्र ‘ग’ में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य में किसी कर्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति  को पत्रादि अंग्रेजी में होंगे। (४) उप नियम (१) और (२) में किसी बात के होते हुए भी, क्षेत्र ‘ग’ में केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र ‘क’ या ‘ख’ में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति  को पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं। परन्तु हिन्दी में पत्रादि ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या, हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय – समय पर अवधारित करे।
 
४. केन्द्रीय सरकार के कार्यालय के बीच पत्रादि -
(क)  केन्द्रीय सरकार के किसी एक मंत्रालय या विभाग और किसी दूसरे मंत्रालय या विभाग के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं:
(ख)  केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग और क्षेत्र ‘क’ में स्थित संलग्न या अधीनस्थ कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी में होंगे और ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार, ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों  की संख्या, हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे संबंधित आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर अवाधारित करें;
(ग) क्षेत्र ‘क’ में स्थित केन्द्रीय सरकार के ऐसे कार्यालयों के बीच, जो खण्ड (क) या खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट कार्यालयों से भिन्न हैं, पत्रादि हिन्दी में होंगे;
(घ)  क्षेत्र ‘क’ में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालय और क्षेत्र ‘ख’ या ‘ग’ में स्थित केन्द्रीय सरकार के कर्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं;
परन्तु ये पत्रादि हिन्दी में ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कर्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या, हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अवाधारित करें;
(ड)  क्षेत्र ‘ख’ या ‘ग’ में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि  हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं; परन्तु ये  पत्रादि हिन्दी में ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या, हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अवधारित करे;
परन्तु जहां ऐसे पत्रादि -
  1. क्षेत्र ‘क’ या क्षेत्र ‘ख’ किसी कार्यालय को संबोधित हैं वहां यदि आवश्यक हो तो, उनका दूसरी भाषा में अनुवाद, पत्रादि प्राप्त करने के स्थान पर किया जाएगा;
(२)  क्षेत्र ‘ग’ में किसी कार्यालय को संबोधित हैं वहां, उनका दूसरी भाषा में अनुवाद, उनके साथ भेजा जाएगा; परन्तु यह और कि यदि कोई पत्रादि किसी अधिसूचित कार्यालय को संबोधित है तो दूसरी भाषा में ऐसा अनुवाद उपलब्ध कराने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
 
५. हिन्दी में प्राप्त पत्रादि के उत्तर -
नियम ३ और नियम ४ में किसी बात के होते हुए भी, हिन्दी में पत्रादि के उत्तर केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से हिन्दी में दिए जाएंगे।
 
६. हिन्दी और अंग्रेजी दोनों का प्रयोग -
अधिनियम की धारा ३ की उपधारा (३) में निर्दिष्ट सभी दस्तावेजों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी दोनों का प्रयोग किया जाएगा और ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का यह उत्तरदायित्व होगा कि वे यह सुनिश्चित कर लें कि ऐसी दस्तावेजें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही में तैयार की जाती हैं, निष्पादित की जाती हैं और जारी की जाती हैं।
 
७. आवेदन, अभ्यावेदन आदि -

(१) कोई कर्मचारी आवेदन, अपील या अभ्यावेदन हिन्दी या अंग्रेजी में कर सकता है।
(२) जब उपनियम  (१) में विनिर्दिष्ट कोई आवेदन, अपील या अभ्यावेदन हिन्दी में किया गया हो या उस पर हिन्दी में हस्ताक्षर किए गए हों, तब  उसका उत्तर हिन्दी में दिया जाएगा।

(३) यदि कोई कर्मचारी यह चाहता है कि सेवा संबंधी विषयों (जिनके अन्तर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियां भी हैं)  से संम्बधित कोई आदेश या सूचना, जिसका कर्मचारी पर तामील किया जाना अपेक्षित है, यथास्थिति , हिन्दी या अंग्रेजी में होनी चाहिए तो वह उसे असम्यक विलम्ब के बिना उसी भाषा में दी जाएगी।
 
८.  केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में टिप्पणों का लिखा जाना -

(१) कोई कर्मचारी किसी फाइल पर टिप्पण या कार्यवृत्त हिन्दी या अंग्रेजी में लिख सकता है और उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह उसका अनुवाद दूसरी भाषा में प्रस्तुत करे।
(२) केन्द्रीय सरकार का कोई भी कर्मचारी, जो हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखता है, हिन्दी में किसी दस्तावेज के अंग्रेजी अनुवाद की मांग तभी कर सकता है, जब वह दस्तावेज विधिक या तकनीक प्रकृति का है, अन्यथा नहीं।
(३) यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विशिष्ट दस्तावेज विधिक तकनीकी प्रकृति का है या नहीं तो विभाग या कार्यालय का प्रधान उसका विनिश्चय करेगा।

(४) उपनियम (१) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा ऐसे अधिसूचित कार्यालयों को विनिर्दिष्ट कर सकती है जहां ऐसे कर्मचारियों द्वारा, जिन्हें हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त है, टिप्पण प्रारूपण और ऐसे अन्य शासकीय प्रयोजनों के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, केवल हिन्दी का प्रयोग किया जाएगा।
 
९. हिन्दी में प्रवीणता- यदि किसी कर्मचारी ने -

(क) मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिन्दी के माध्यम से उत्तीर्ण कर ली है ; या
(ख) स्नातक परीक्षा में अथवा स्नातक परीक्षा की समतुल्य या उससे उच्चतर किसी अन्य परीक्षा में हिन्दी को एक वैकल्पिक  विषय के रूप में लिया था ; या
(ग) यदि वह इन नियमों  से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता है कि उसे हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त है;

तो उसके बारे में यह समझा जाएगा की उसने हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है ।
 
१०.  हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान -
(१) (क) यदि किसी कर्मचारी ने
(१) मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर परीक्षा हिन्दी विषय के साथ  उर्त्तीण कर ली है; या
(२) केन्द्रीय सरकार की हिन्दी परीक्षा योजना के अन्तर्गत आयोजित प्राज्ञ परीक्षा या यदि उस सरकार द्वारा किसी विशिष्ट प्रवर्ग के पदों के सम्बन्ध में उस  योजना के अन्तर्गत कोई निम्नतर परीक्षा विनिर्दिष्ट है,. वह परीक्षा उर्त्तीण कर ली है; या
(३) केन्द्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई अन्य परीक्षा उर्त्तीण कर ली है; या
(ख) यदि वह इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता है कि उसने  ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है; तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया हैं।
(२) यदि केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय में कार्य करने वाले कर्मचारियों मे से अस्सी प्रतिशत ने हिन्दी का ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है तो उस कायार्लय के कर्मचारीयों के बारे में सामान्यतया यह समझा जाएगा कि उन्होंने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है।
(३) केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई अधिकारी यह अवधारित कर सकता है कि केन्द्रीय सरकार के किसी कायार्लय के कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है या नहीं।
(४) केन्द्रीय सरकार के जिन कार्यालयों में कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है उन कार्यालयों के नाम राजपत्र में अधिसूचित किए जाएंगे। परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार की राय है कि किसी अधिसूचित कार्यालय में काम करने वाले और हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले कर्मचारियों का प्रतिशत किसी तारीख में से उपनियम (२) में विनिर्दिष्ट प्रतिशत से कम हो गया है, तो वह राजपत्र में अधिसुचना द्वारा घोषित कर सकती है कि उक्त कार्यालय उस तारीख से अधिसूचित कार्यालय नहीं रह जाएगा।
 
११. मैनुअल, संहिताएं , प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य, लेखन सामग्री आदि

(१) केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से संबंधित सभी मैनुअल, संहिताएं और प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य, हिन्दी और अंग्रेजी में द्विभाषिक रूप में यथास्थिति, मुद्रित या साइक्लोस्टाइल किया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा।
(२) केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय में प्रयोग किए जाने वाले रजिस्टरों के प्ररूप और शीर्षक हिन्दी और अंग्रेजी में होंगे।
(३) केन्द्रीय सरकार के किसी कायार्लय में प्रयोग के लिए सभी नामपट्‌ट, सूचना पट्‌ट, पत्रशीर्ष और लिफाफों पर उत्कीर्ण लेख तथा लेखन सामग्री की अन्य मदें हिन्दी और अंग्रेजी में लिखी जाएंगी, मुद्रित या उत्कीर्ण होंगी;

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक समझती है तो वह, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय को इस नियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों से छूट दे सकती है।
 
१२. अनुपालन का उत्तरदायित्व -

(१) केन्द्रीय सरकार के प्रत्येक कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह -
(i) यह सुनिश्चित करे कि अधिनियम और इन नियमों के उपबंधों और उपनियम  (२) के अधीन जारी किए गए निदेशों का समुचित रूप से अनुपालन हो रहा है; और
(ii) इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त और प्रभावकारी जांच के लिए उपाय करे।

 केन्द्रीय सरकार अधिनियम और इन नियमों के उपबन्धों के सम्यक अनुपालन के लिए अपने कर्मचारियों और कार्यालयों को समय-समय पर आवश्यक निदेश जारी कर सकती है।
 
प्ररूप
(नियम ९ और १० देखिए)
मैं इसके द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि निम्नलिखित के आधार पर *मुझे हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त है / मैंने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है:-
 
(हस्ताक्षर)
तारीख:
 
* जो लागू न होता हो, उसे कृपया काट दीजिए ।
 
भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएँ

(धारा ३४४ (), धारा ३५१ )

(Article 344(1) & 351)
 
१. असमी २. बंगाली ३. बोडो ४. डोगरी ५. गुजराती
६. हिन्दी ७. कन्नड ८. कश्मीरी ९. कोंकणी १०. मैथिली
११. मलयालम १२. मणिपुरी १३. मराठी १४. नेपाली १५. उडिया
१६. पंजाबी १७. संस्कृत १८. संथाली १९. सिंधी २०. तामिल
२१. तेलुगु २२. उर्दु      
 
 
मूल पृष्ठ |   विभाग |   सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५ |   शब्दकोश |   संपर्क करें